Breaking News

23 जून/बलिदान-दिवस डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान

छह जुलाई, 1901 को कोलकाता में श्री आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है। पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे। श्री आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे।1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामाप्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया। 33 वर्ष की छोटी अवस्था में ही उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति की उस कुर्सी पर बैठने का गौरव मिला, जिसे किसी समय उनके पिता ने विभूषित किया था। चार वर्ष के अपने कार्यकाल में उन्होंने विश्वविद्यालय को चहुँमुखी प्रगति के पथ पर अग्रसर किया।

दूसरे जिस कारण से डा. मुखर्जी को याद किया जाता है, वह है जम्मू कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय की माँग को लेकर उनके द्वारा किया गया सत्याग्रह एवं बलिदान। 1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद गृहमन्त्री सरदार पटेल के प्रयास से सभी देसी रियासतों का भारत में पूर्ण विलय हो गया; पर प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण जम्मू कश्मीर का विलय पूर्ण नहीं हो पाया। उन्होंने वहाँ के शासक राजा हरिसिंह को हटाकर शेख अब्दुल्ला को सत्ता सौंप दी। शेख जम्मू कश्मीर को स्वतन्त्र बनाये रखने या पाकिस्तान में मिलाने के षड्यन्त्र में लगा था।

शेख ने जम्मू कश्मीर में आने वाले हर भारतीय को अनुमति पत्र लेना अनिवार्य कर दिया। 1953 में प्रजा परिषद तथा भारतीय जनसंघ ने इसके विरोध में सत्याग्रह किया। नेहरू तथा शेख ने पूरी ताकत से इस आन्दोलन को कुचलना चाहा; पर वे विफल रहे। पूरे देश में यह नारा गूँज उठा – एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान: नहीं चलेंगे।

डा. मुखर्जी जनसंघ के अध्यक्ष थे। वे सत्याग्रह करते हुए बिना अनुमति जम्मू कश्मीर में गये। इस पर शेख अब्दुल्ला ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 20 जून को उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें कुछ ऐसी दवाएँ दी गयीं, जिससे उनका स्वास्थ्य और बिगड़ गया। 22 जून को उन्हें अस्पताल में भरती किया गया। उनके साथ जो लोग थे, उन्हें भी साथ नहीं जाने दिया गया। रात में ही अस्पताल में ढाई बजे रहस्यमयी परिस्थिति में उनका देहान्त हुआ।

मृत्यु के बाद भी शासन ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया। उनके शव को वायुसेना के विमान से दिल्ली ले जाने की योजना बनी; पर दिल्ली का वातावरण गरम देखकर शासन ने विमान को अम्बाला और जालन्धर होते हुए कोलकाता भेज दिया। कोलकाता में दमदम हवाई अड्डे से रात्रि 9.30 बजे चलकर पन्द्रह कि.मी दूर उनके घर तक पहुँचने में सुबह के पाँच बज गये। 24 जून को दिन में ग्यारह बजे शुरू हुई शवयात्रा तीन बजे शमशान पहुँची। हजारों लोगों ने उनके अन्तिम दर्शन किये।

05 अगस्त 2019 को तेजस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया है और इसे सदैव के लिए इतिहास के कूडेदान में फैंक दिया है।इस प्रकार कश्मीर के भारत में संपूर्णता से एकीकृत करके श्यामाप्रसाद मुखर्जी को असली श्रद्धांजलि दी है।अनुच्छेद 370 कश्मीर में अलगाववाद को बढाने वाला एक मनोवैज्ञानिक प्रावधान था।
…………………………………………… शिवम पाण्डेय ABVP आज़मगढ़

About ADIRYA PRINCE

ADIRYA PRINCE

Check Also

आधिवक्ता/वादकारीगण सुरक्षा/थर्मल स्कैनर से जाँचोपरान्त ही न्यायालय परिसर में प्रवेश करेंगे,,

प्रेस नोटआजमगढ़ 07 जून– बलराम दास, प्रभारी सचिव / सिविल जज (अवर खण्ड) हवाली आजमगढ, …

उत्तर प्रदेश में 2 IAS अफ़सरो का तबादला

IAS राजेश कुमार होगे आजमगढ़ के नये जिलाधिकारी, DM आजमगढ़ IAS नागेंद्र प्रसाद सिंह 31 …

फिर हुई करोना संदिग्ध महिला की मौत आज़मगढ़ । मुंबई से बेटे के साथ स्पेशल …

मुलायम सिंह यादव पर अभद्र टिप्पणी से सपाई नाराज, एसपी से की कार्रवाई की मांग

आजमगढ़. अध्योया में कारसेवकों पर हुई फायरिंग को लेकर एक युवक द्वारा पूर्व सीएम व …

मुलायम सिंह यादव पर अभद्र टिप्पणी से सपाई नाराज, एसपी से की कार्रवाई की मांग

आजमगढ़. अध्योया में कारसेवकों पर हुई फायरिंग को लेकर एक युवक द्वारा पूर्व सीएम व …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: