Breaking News

‘शैव परम्परा का अवदान है नाथ सम्प्रदाय’: डॉ.अरविन्द

बांसगांन संदेश: गोरखपुर

“भारत में शिव ही सर्वप्रथम मानव संस्कृति के नाथ माने जाते हैं, और उन्हीं के दर्शन को आगे प्रवर्तित करने का कार्य नाथ सम्प्रदाय ने किय।” उक्त बातें आज दिनांक 24 जून 2020 को महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोध पीठ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित  ऑनलाइन फेसबुक लाइव व्याख्यान माला के क्रम में विशिष्ट व्याख्यानकर्ता के रूप में पधारे डॉ अरविंद कुमार सिंह रीडर शिवपति पी.जी. कॉलेज शोहरतगढ़ ने कही। डॉ.सिंह प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में गोरक्ष प्रांत के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख भी हैं। इनके द्वारा “भारत की अखंडता में श्री गोरक्षपीठ, गोरखपुर का अवदान”  विषय पर सारगर्भित व्याख्यान के माध्यम से नाथ संप्रदाय और महायोगी श्री गुरु गोरक्षनाथ की लोक व्याप्ति और उनके व्यक्तित्व के प्रभाव द्वारा  भारत की अखंडता में  श्री गोरक्ष पीठ  गोरखपुर  का अवदान का विशद वर्णन किया गया।

डॉ.सिंह ने कहा कि भारतवर्ष की संस्कृति और इसकी परंपरा हजारों वर्षों से नियत प्रवाह मान है। जब विश्व में कहीं भी संस्कृति नहीं थी एवं मानव का सामाजिक विकास नहीं हुआ था, और पश्चिम में सभ्यता प्रारंभ भी नहीं हुई थी, तब भारत में एक अत्यंत विकसित सभ्यता अपने चरम पर थी। उस काल में भारत में वेद, पुराण और उपनिषदों की रचना हो रही थी जो भारतीय संस्कृति की महानता और उसकी अखंडता का परिचायक है।

उन्होंने अपने व्याख्यान में भूमि, देश, राज्य और राष्ट्र को अखंडता के संदर्भ में परिभाषित करते हुए बताया कि भूमि एक निर्जन स्थान होता है। जब मानव वहां पर निवास करता है तो वहां जनसमुदाय का वास होता है और वह एक देश बन जाता है, और राज्य के नियम कानून के द्वारा वह संचालित होता है। राष्ट्र का संबंध वहां के निवासियों की भावना से होता है जो परंपराओं की देन होती है। यह किसी भी राष्ट्र की अखंडता और एकता के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।

हिन्दुत्व के सन्दर्भ में डॉ. सिंह ने बताया कि राष्ट्र की अखंडता के लिए यह बेहद आवश्यक है। उन्होने कहा कि हिंदू एक जीवन पद्धति है जिसमें समान धर्म, समान परंपराएं, समान इतिहास और समान भविष्य की आकांक्षाएं होती है और यही हमारे भारत की संस्कृति रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी के सपनों की भारत की बात की जो एक अखंड राष्ट्र की संकल्पना पर आधारित थी। विभिन्न कालों में भारत के अनेक नाम रहे जो उसके निरंतरता और उसकी अखंडता का प्रतीक है।

उन्होंने विष्णु पुराण में वर्णित अखंड भारत की भौगोलिक स्थिति का भी वर्णन किया जो पूरब में अरुणाचल से पश्चिम में गुजरात और उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक सप्त पर्वतों,  सप्त नदियों,  सप्त मोक्षदायिनी नगरों  और  इक्यावन शक्तिपीठों के  रूप में विस्तारित है। डॉक्टर सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारत की राजनीतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक एकता अखंड रही है, जिसका श्रेय हमारे देश के महापुरुषों को जाता है। इन्हीं महापुरुषों में महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का नाम सबसे प्रमुख है। ऋग्वेद के दशम मंडल में सृष्टि के संरक्षक ही नाथ हैं। जहां नाथ का अर्थ अनादि से है भगवान शिव ही प्रथम नाथ है, और उन्होंने ही  नाथ परंपरा की शुरुआत की। भगवान शिव का स्थान कैलाश पर्वत है और उनको प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने भारत के  दक्षिणतम छोर कन्या कुमारी में तपस्या की थी, जो उत्तर में हिमालय से दक्षिण में कन्याकुमारी तक देश की अखंडता का प्रतीक है। इसी प्रकार देश में द्वादश ज्योतिर्लिंग भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित हैं जो भारत की अखंडता का प्रतीक है और जो  देश की एकता को सुदृढ़ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। डॉ. सिंह ने अपने व्याख्यान में गोरक्षनाथ परंपरा में नवनाथ, नाथ सिद्धों और 12 पंथ के बारे में भी बताया और कहा कि नाथ संप्रदाय के प्रथम गुरु महायोगी श्री मछिंद्रनाथ जी ने देश और विश्व के अन्य देशों के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर एकीकरण करने का काम किया। उन्होंने बताया नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि अनेक देशों में नाथ पंथ के स्थल आज भी हैं। डॉ सिंह ने महायोगी गुरु गोरखनाथ जी के भारत की अखंडता में महत्वपूर्ण योगदान को प्रतिपादित किया और कहा कि देश की अखंडता में पेशावर के हिंगलाज  से कामरूप कामाख्या असम तक गुरु श्री गोरखनाथ की महिमा और परंपरा रही है। उन्होंने अपने व्याख्यान में नाथ पंथ की 12 शाखाओं सत्यनारायण पंत उड़ीसा, धर्मनाथ पंथ कच्छ गुजरात, कमलानी पंथ गंगा सागर , राम नाथ पंथ गोरखपुर दिल्ली, जिसने संपूर्ण भारत को एकता और अखंडता की डोरी में पिरोने का काम किया। नाथ पंथ में योगियों की एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमणशीलता ने देश की अखंडता और एकता को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डॉ सिंह ने  गोरक्षनाथ पीठ गोरखपुर में महंत परंपरा के संदर्भ में बताते हुए कहा कि योगी महंत श्री दिग्विजय नाथ जी, योगी महंत श्री अवैद्यनाथ जी और योगी महंत श्री आदित्यनाथ जी ने लगातार अपने कार्यों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने मे लगातार प्रयास करते रहे हैं उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखना ही प्रत्येक देशवासी का परम कर्तव्य है। डॉ. सिंह  ने अपने व्याख्यान के अंत में महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोध पीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो रविशंकर सिंह जी को हृदय से धन्यवाद दिया और इस  व्याख्यान माला के  संयोजक डॉ पवन कुमार और आयोजन समिति के सदस्य डॉ गौरी शंकर चौहान, डॉ निखिल कुमार, डॉ सूर्य कांत त्रिपाठी, डॉ तूलिका मिश्रा, डॉ आरती यादव और डॉ सर्वेश कुमार को इस व्याख्यान माला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी। 

About डॉ अशोक कुमार श्रीवास्तव गजपुर

डॉ अशोक कुमार श्रीवास्तव गजपुर

Check Also

मुख्यमंत्री योगी सहित पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने डॉ. कल्बे सादिक के निधन को ट्वीट कर क्षति बताया

… और तुम्हीं सो गए दास्तां कहते – कहते शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक …

मुख्यमंत्री योगी सहित पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने डॉ. कल्बे सादिक के निधन को ट्वीट कर क्षति बताया

… और तुम्हीं सो गए दास्तां कहते – कहते शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक …

बिस्मिल भवन में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण स्थान्तरित किया,

गोरखपुर।। बहुत संघर्षो के बाद जिला प्रशासन विवश होकर बिस्मिल भवन में मोटर दुर्घटना दावा …

वाराणसी में पुलिस चौकी की अवैध वसूली की लिस्ट ट्विटर पर वायरल, मचा हड़कंप,

उत्तरप्रदेश।। वाराणसी। चंदौली के मुगलसराय थाने की अवैध वसूली की लिस्ट वायरल होने का मामला …

मारपीट व छेडख़ानी का अभियुक्त गिरफ्तार

गोरखपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार के अपराधियों के खिलाफ अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: