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कोरोना कहर : 44.18 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने दी खंड शिक्षा अधिकारी की परीक्षा

उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में 1127 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 233393 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए जबकि 294921 अनुपस्थित रहे।

प्रयागराज : कोरोना वायरस के संक्रमण की भयावह स्थिति के बीच कराई गई उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रारंभिक परीक्षा-2019 में 44.18 प्रतिशत अभ्यर्थी शामिल हुए। रविवार को प्रदेश के 18 जिलों में 1127 केंद्रों पर दोपहर 12 से दो बजे तक परीक्षा आयोजित हुई। प्रदेशभर में 2,33,393 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 2,94,921 अनुपस्थित रहे। प्रयागराज में 106 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई। यहां 48,900 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होना था। लेकिन, 25,773 उपस्थित हुए, जबकि 23,127 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। प्रयागराज में अभ्यर्थियों की उपस्थिति 52.71 प्रतिशत रही। परीक्षा के दौरान कहीं से नकल, पेपर लीक, हंगामा होने जैसा मामला सामने नहीं आया।

उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने 12 दिसंबर 2019 को खंड शिक्षा अधिकारी की 309 पदों की भर्ती निकाली थी। अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन 13 जनवरी तक लिया गया। इसमें 5,28,314 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा में सिर्फ बीएड डिग्री धारक ही शामिल हुए। नकलमुक्त परीक्षा कराने के लिए आयोग ने काफी कड़ाई की थी। परीक्षा केंद्रों के अंदर व बाहर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी कराई गई। केंद्र के आस-पास मोबाइल की नेटवर्किंग ध्वस्त करने के लिए जैमर लगाया गया। परीक्षा केंद्रों के आस-पास परिजनों को रुकने की अनुमति नहीं थी। केंद्रों पर अधिकारियों की आवाजाही निरंतर बनी रही।


15 मिनट बाद तक मिला प्रवेश : कोरोना संक्रमण व साप्ताहिक बंदी की वजह से अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट बाद तक प्रवेश दिया गया। परीक्षा कक्ष में एक घंटा पहले से प्रवेश दिया जाने लगा। हर केंद्र पर सेनिटाइजेशन कराकर अभ्यर्थी को मास्क लगाकर परीक्षा दिलाई गई।

12 साल बाद निकली भर्ती : खंड शिक्षा अधिकारी की यह भर्ती 12 साल बाद निकली है। इसके पहले 2007 में भर्ती निकली थी। लोकसेवा आयोग द्वारा जनवरी में जारी किए गए कैलेंडर में उक्त भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा 22 मार्च को प्रस्तावित थी। लेकिन, कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। फिर संशोधित परीक्षा कैलेंडर में बीईओ-2019 की प्रारंभिक परीक्षा की तारीख 16 अगस्त तय की गई। साप्ताहिक बंदी व कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति का हवाला देकर कुछ अभ्यर्थी परीक्षा टालने की मुहिम चला रहे थे। मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के साथ हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। लेकिन, कहीं भी उनकी मांग स्वीकार नहीं हुई और परीक्षा तय तारीख पर कराई गई।

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